सुविचारों का दरिया😇
@Suvichar_Ka_Dariya☀️दरिया बनकर किसीको 🌤डुबाने से बेहतर है, की जरिया बनकर किसीको🌤 बचाया जाए !☀️ ⛈⛈⛈⛈⛈⛈⛈⛈⛈⛈⛈ बेस्ट सुविचार 💫💫🪐😊😊😊😜😊😍😍🤔🤗💪💪🤘 Contact -. 1- @Vaibhav100 2- @anshuman5555
Посты канала (20)
- यादों का कब्ज़ा खट-खट करती आती हैं यादें, खोल देती हैं दरवाज़ा उसकी बातें। घुस जाती है वो घर के अंदर, एक-एक सीढ़ी चढ़ प… 13.06.2026
- हम उस देश से आते हैं... हम उस देश से आते हैं जहाँ दोनों हाथ जोड़कर नमस्ते किया जाता है जहाँ सम्मान शब्दों से नहीं संस्क… 12.06.2026
- अगर तलाश करूँ कोई मिल ही जाएगा मगर तुम्हारी तरह कौन मुझ को चाहेगा तुम्हें ज़रूर कोई चाहतों से देखेगा मगर वो आँखें हमारी… 06.06.2026
- https://youtu.be/xibZg99LQyg 02.06.2026
- Пост без текста 31.05.2026
- Пост без текста 28.05.2026
- अब नए पंछियों के कदम जब पड़ेंगे इन्हीं शाख पर अपनी फेंकी किताबें कभी खेंच लेगी इन्हें बाह में कुछ सड़ेंगे इन्हें चूम कर… 11.05.2026
- धड़कनों की तिलावत में मेरा नाम रख देना... रात की आख़िरी दुआ में इक पैग़ाम रख देना... मैं अगर वक़्त की गर्द में कहीं खो … 10.05.2026
- _किसी के जाने पर_ किसी के आने पर क्या क्या बदल जाता है हमें ठीक से ज्ञात नहीं पड़ता। किसी के जाने पर सब कुछ बदल जाता है… 09.05.2026
- हर दर्द की एक दवा है ब्राह्मणवाद से आज़ादी, राजनीति के हर मंच पर गूंजे ब्राह्मणवाद से आज़ादी। देश में पॉल्यूशन है, ये भ… 08.05.2026
- जब मणिकर्णिका घाट की आग दो पल को भी ठहरना नहीं जानती, वहाँ समय भी सिर झुकाकर राख की भाषा में बात करता है। कतार में पड़े… 07.05.2026
- हमें आज किसी ने शैतान कहा, फिर मैं उनसे पूछा ऐसा क्यों कहा ? उसने अपने ही अंदाज में जबाव दिया तेरी हरकते तो थमने का नाम… 06.05.2026
- हमारे संस्कार::::🩶 हमारे संस्कार कहते हैं ज़िंदगी भर किसी लड़के को आंख उठाकर मत देखो… बात मत करो… हंसो मत… पास मत बैठो… 14.04.2026
- रोटी बनाती स्त्री ******* रोटी बनाते वक्त कुछ सोचती है स्त्री कपड़े धोते वक्त भी किन्हीं विचारों में गुम रहती है कमरे मे… 13.04.2026
- समय की सरिता बहता है चुपचाप, समय का पानी, न पूछे कुछ, न बोले कहानी। पल में जीवन, पल में मरण, यह कालचक्र है चिर अनंत। घड… 12.04.2026
- फिर वही मन में उदासी छा रही है अब जरा सी भागकर मैं खुद ही खुद से, किस नगर होऊँ प्रवासी ॥ कौन है जो आज मेरे शीर्ण मन को … 11.04.2026
- उस दिन छत से पानी टपक रहा था, मैं सिर दीवार पर पटक रहा था। क्या-क्या करना था और क्या कर दिया, यही सोच बस पाँव ज़मीन पर … 10.04.2026
- लगता है यूँ गमले से हो फूल गया माँ से बिछड़ा बच्चा जब स्कूल गया गाँव से निकला, दिल्ली में मज़दूर हुआ उम्मीदों का मारा जीन… 09.04.2026
- उपसंहार धुंध में रखी एक कुर्सी की तरफ़ दस लाख कलमें भागती हैं, लाइब्रेरी की खामोशी में साल दर साल उम्र हाशियों में घिसत… 08.04.2026
- अपने कुछ ऐसे ही दोस्तों के लिये -उन्होंने कभी गुलाब नहीं दिया चुम्बन नहीं लिया वह मेरे प्रेमी नहीं अपितु ऐसे दोस्त थे ज… 07.04.2026