Jindgi gulzar hai
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Посты канала (20)
- ठुकरा दी जानी चाहिए हर वो रानी, जिसको साथ जीने में हो परेशानी..🖤 20.07.2024
- वो जब पास आती है, जैसे दिल को सुकून मिलता है, उसकी हर नज़र में, जैसे जन्नत का नूर खिलता है। 01.07.2024
- तेरे बिना ये रातें अधूरी, चाँद भी गुमसुम है, तेरी यादों में डूबा, दिल भी बेकरार सा है। 27.06.2024
- उसकी खामोशी में छुपी एक अदा है, उसकी हर बात में, बसी एक दुआ है। 20.06.2024
- तेरी राहों में चलते चलते, दिल ने क्या नहीं पाया, तेरी चाहत में खोकर, खुद को फिर नहीं पाया। 19.06.2024
- वो पलकों की छाँव में छुपे अरमान सारे, उसकी हँसी में जैसे गुलाबों के नज़ारे। 15.06.2024
- आँखों की चमक में, दिल की गहराई है, उसकी बातों में जैसे, चाँदनी की परछाई है। 13.06.2024
- बहुत कुछ लिखना होता है... कई बार..!!. आज भी लिखना था इस चक्कर में आज बीत गया और कल हो गया...!!! कई बार शब्द नहीं मिले क… 12.06.2024
- तेरी यादों का मौसम, हर पल मुझसे मिलता है, हर सास में तेरा नाम, दिल में बस तू ही बसता है। 11.06.2024
- मोहब्बत की राहों में चलते चलते, हम भी खो गए, उसके ख्वाबों में डूबे, जैसे चाँद सितारों में खो गए। 10.06.2024
- खामोशियाँ भी बातें करती हैं, हर आहट में एक साज़ है, उसकी मुस्कान में छुपी, अनकही बहुत सी राज़ है। 09.06.2024
- उसकी आँखों में बसी एक खामोशी है, हर लफ़्ज़ में छुपी एक कहानी है। वो जब भी हँसता है, जैसे चाँदनी बिखरती है, और उसकी चुप्… 08.06.2024
- हाथ न मिलने के इस दौर में हम तुमसे गले मिलना चाहते हैं -इमरान मिर्ज़ा 06.06.2024
- हमारे नसीब में कांटे आए... फूलों से हमारा वास्ता ही क्या... डांट अपनी ..फटकार अपनी... प्यार से हमारा वास्ता ही क्या....… 05.06.2024
- हसरतों के बाजार में नीलाम हो रहे थे कुछ रिश्ते... मैने उस रोज तुमको नजरें चुराते देखा..!! हमने सोचा तुम तो रुकोगे मेरे … 03.06.2024
- सुबह की नींद खुलने के साथ खुल जाती है ज़िंदगी... चिड़ियों की चहक के बीच मां जब उठाती है तो थोड़ा सा हूं - हूं करके फिर … 02.06.2024
- बहुत कुछ लिखना होता है... कई बार..!!. आज भी लिखना था इस चक्कर में आज बीत गया और कल हो गया...!!! कई बार शब्द नहीं मिले क… 02.06.2024
- कुछ इस अदा से निभाना है किरदार मेरा मुझको , जिन्हें मुहब्बत ना हो मुझसे वो नफरत भी ना कर सके! 31.05.2024
- बहुत कुछ लिखना होता है... कई बार..!!. आज भी लिखना था इस चक्कर में आज बीत गया और कल हो गया...!!! कई बार शब्द नहीं मिले क… 29.05.2024
- कल तक कायल थे हम जिनके आजाद विचारों के... वो कातिलों में गिने जाते हैं बेबस और लाचारों के... पत्रकारिता बिकी हुई.. उसकी… 27.05.2024